Thursday, July 30, 2015

AUSPICIOUS INAUSPICIOUS OMENS शुभाशुभ-शकुन विचार

AUSPICIOUS INAUSPICIOUS OMENS 
शुभाशुभ-शकुन विचार
CONCEPTS & EXTRACTS IN HINDUISM
By :: Pt. Santosh Bhardwaj
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ॐ गं गणपतये नम:।
अक्षरं परमं ब्रह्म ज्योतीरूपं सनातनम्।
निराकारं स्वेच्छामयमनन्तजम्॥
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भुर्मा ते संगोऽस्त्वकर्मणि
[श्रीमद्भगवद्गीता 2.47]
From my early childhood I have been noticing the weeping of dogs or cat nearby indicated some death near by. In Barely howling of dogs was associated with earth quake  and loss of property & human lives. Crossing of black cat from left to right direction always indicated that the purpose for which one moved out of the house was never accomplished. Sighting of cows, calf, bull on the right sided indicated accomplishment of the purpose of moving out of house.
तुलसीकृत श्री राम  मानस ::
प्रभु श्री राम की बरात जब अयोध्या से प्रस्थान करती है, उस समय क्या-क्या शुभ शकुन होते हैं?
मंगलमय कल्यानमय अभिमत फल दातार।
जनु सब साचे होन हित भए सगुन एक बार॥
सभी मंगलमय, कल्याणमय और मनोवांछित फल देने वाले शकुन मानो सच्चे होने के लिए एक ही साथ हो गए। 
बनइ न बरनत बनी बराता। होहिं सगुन सुंदर सुभदाता॥
चारा चाषु बाम दिसि लेई। मनहुँ सकल मंगल कहि देई॥
बारात ऐसी बनी है कि उसका वर्णन करते नहीं बनता। सुंदर शुभदायक शकुन हो रहे हैं। नीलकंठ पक्षी बाईं ओर चारा ले रहा है, मानो सम्पूर्ण मंगलों की सूचना दे रहा हों।
दाहिन काग सुखेत सुहावा। नकुल दरसु सब काहूँ पावा॥
सानुकूल बह त्रिबिध बयारी। सघट सबाल आव बर नारी॥
दाहिनी ओर कौआ सुंदर खेत में शोभा पा रहा है। नेवले का दर्शन भी सब किसी ने पाया। तीनों प्रकार की (शीतल, मंद, सुगंधित) हवा अनुकूल दिशा में चल रही है। श्रेष्ठ (सुहागिनी) स्त्रियाँ भरे हुए घड़े और गोद में बालक लिए आ रही हैं।
लोवा फिरि फिरि दरसु देखावा। सुरभी सनमुख सिसुहि पिआवा॥
मृगमाला फिरि दाहिनि आई। मंगल गन जनु दीन्हि देखाई॥
लोमड़ी फिर-फिरकर (बार-बार) दिखाई दे जाती है। गायें सामने खड़ी बछड़ों को दूध पिलाती हैं। हिरणों की टोली (बाईं ओर से) घूमकर दाहिनी ओर को आई, मानों सभी मंगलों का समूह दिखाई दिया॥
छेमकरी कह छेम बिसेषी। स्यामा बाम सुतरु पर देखी॥
सनमुख आयउ दधि अरु मीना। कर पुस्तक दुइ बिप्र प्रबीना॥
क्षेमकरी (सफेद सिरवाली चील) विशेष रूप से क्षेम (कल्याण) कह रही है। श्यामा बाईं ओर सुंदर पेड़ पर दिखाई पड़ी। दही, मछली और दो विद्वान ब्राह्मण हाथ में पुस्तक लिए हुए सामने आए। 
(1). प्रातः काल जागते ही यदि शंख, घंटा, भक्ति संगीत आदि का स्वर सुनाई दे तो अत्यंत शुभ होता है। आपका पूरा दिन हर्षपूर्ण बीतेगा।
(2). यदि जागने पर सबसे पहले दही या दूध से भरे पात्र पर निगाह पड़े तो भी शुभ समझा जाता है।
(3). यदि सुबह-सुबह घर में कोई भिखारी माँगने आ जाए तो यह समझिये कि आपका फँसा हुआ या उधार दिया हुआ धन आपको शीघ्र ही वापस मिलेगा।
(4). यदि घर से किसी कार्य से बाहर जाते हुए तो आपके सामने सुहागन स्त्री अथवा गाय आ जाए तो कार्य में पूर्ण सफलता मिले का योग बनता है।
(5). किसी कार्य से जाते हुए आपके सामने कोई व्यक्ति गुड़ ले जाता हुआ दिखे तो बहुत अधिक लाभ होता है।
(6). यदि रास्ते में कोई प्राणी सुन्दर फूल या हरी घास लेकर जाता मिले या आपको किसी दुकान में यह नज़र आ जाये तो बहुत शुभ होता है ।
(7). यदि जाते समय मार्ग में कोई भी स्त्री या पुरुष दूध या पानी से भरा बर्तन लेकर दिख जाये तो यह बहुत ही शुभ शकुन होता है ।
(8). यात्रा में जाते समय यदि प्रभु की आरती, भजन आदि सुनाई दे तो यह बहुत ही शुभ माना जाता है, आपकी यात्रा के सफल होने के पूरे योग हैं।
(9). यदि मार्ग में हँसता खेलता हुआ बालक और फल फूल बेचने वाला कोई नज़र आ जाये तो आपको निसंदेह लाभ की प्राप्ति होगी ।
(10). किसी भी कार्य के लिए जाते समय जब आप कपड़े पहने और आपकी जेब से पैसे गिर जाएँ तो यह धन प्राप्ति का संकेत है और यदि कपड़े उतारते समय भी ऐसा ही हो तो भी यह शुभ शकुन होता है।
(11). यदि आपके शरीर पर चिड़िया बीट कर दे तो यह समझिये की आपकी दरिद्रता दूर होने वाली है। ये बहुत ही शुभ शकुन हैं।
(12). यदि घर से बाहर निकलते ही आप वर्षा से भीग जाएँ तो यह बहुत ही शुभ शकुन है।
(13). यदि घर से बाहर किसी भी कार्य के लिए जाते समय आपको राह में साधू-सन्यासी आदि दिखाई पद जाएँ तो यह भी आपकी यात्रा के लिए अति शुभ शकुन होता है।
(14). ब्राह्मण, घोड़ा, हाथी, नेवला, बाज, मोर, दूध, दही, फल, फूल, कमल, भक्ति संगीत, अन्न, जल से भरा कलश, बँधा हुआ एक पशु, मछली, प्रज्वलित अग्नि, छाता, वैश्या, कोई भी शस्त्र, कोई भी रत्न, स्त्री, कन्या, धुले हुए वस्त्र सहित धोबी, घी, मिट्टी, सरसों, गन्ना, शव यात्रा, पालकी, ध्वजा, बकरा, अपना प्रिय मित्र, बच्चे के सहित स्त्री, गाय-बछड़ा सहित, सफेद बैल, साधु, कल्पवृक्ष, शहद, शराब या कूड़े से भरी टोकरी, सामान से लदा वाहन यदि यात्रा के वक्त यह कुछ भी राह में पड़ जाए तो निश्चय ही सफलता प्राप्त होगी।
SIGHTATION OF TWO RAINBOWS ::
Two years ago, while in Australia-Paramatta-Sydney, I repeated saw two rainbows occurring together. It followed a long period of no rains, jungle fires. A few days ago two rainbows were sighted in India as well. In this Corona Kal, Corona is going to explode and grossly incompetent ministers, officials will prove to be grossly helpless. Kejriwal, Udhav have already proved their incompetence. Jhuggi-Jhonpri dwellers and urbanised villages are more or less like slums. They are unmanageable and spread Corona beyond limits. Delhi has already observed 13 earth quakes. Last year pollution was recorded at its highest in Noida, Delhi & Ghaziabad creating world records. More and more deaths occurring due to  Cancer. It indicates worst ever war as well. [11.06.2020] 
Prior to Maha Bharat hundreds of inauspicious omens like falling of blood and pus from sky, giving birth to ass by cows etc. were observed. 
Spotting of white cloths, clear water, tree laden with fruits, clear sky, grain crop in the fields, black grain is considered to be in auspicious. Cotton, Dung mixed with straw, money, embers-fire, home, shaved headed naked sadhu having massaged oil, iron, leather, mud, hair, mad person, impotent, too are inauspicious. 
श्र्वेत वस्त्र, स्वच्छ जल, फल से भरा हुआ वृक्ष, निर्मल आकाश, खेत में लगे हुए अन्न और काला धान्य-इनका यात्रा के समय दिखाई देना अशुभ है। रुई, त्रण मिश्रित सूखा गोबर (कंडा), धन, अंगार, गृह, करायल, मूँड़ मुड़ाकर तेल लगाया हुआ नग्न साधु, लोहा, कीचड़, चमड़ा, बाल, पागल मनुष्य, हिजड़ा, चाण्डाल, श्र्वपच, बान्धव की रक्षा करने वाला मनुष्य, गर्भिणी स्त्री, राख, खोपड़ी, हड्डी और फूटा हुआ बर्तन-युद्ध यात्रा के समय इनका दिखाई देना अशुभ है। बाजों का वह शब्द जिससे फूटे हुए झाँझ की भयंकर ध्वनि सुनाई पड़ती हो, अच्छा नहीं माना गया है। पीछे से "चले आओ" सुनाई दे तो अशुभ है। "जाओ" शब्द आगे से सुनाई दे तो निन्दित है। कहाँ जाते हो ? ठहरो, न जाओ; वहाँ जाने से तुम्हें क्या लाभ है? ऐसे शब्द अनिष्ट के सूचक हैं। यदि ध्वजा के ऊपर चील आदि माँसाहारी पक्षी बैठ जाये, घोड़े, हाथी, आदि लड़खड़ा कर गिर पड़ें, हथियार टूट जायें, हार आदि के द्वारा मस्तक पर चोट लगे तथा छत्र और वस्त्र आदि को, कोई गिरा दे तो, ये सब अपशकुन मृत्यु का कारण बनते हैं। भगवान् विष्णु की पूजा और स्तुति करने अमंगल का नाश होता है। यदि दूसरी बार इन अपशकुनों का दर्शन हो तो घर लौट आना चाहिये। 
यात्रा के समय श्वेत पुष्पों का दर्शन श्रेष्ठ है। भरे हुए घड़े का दिखाई देना तो बहुत ही श्रेष्ठ है। माँस, मछली, दूर का कोलाहल, अकेला वृध पुरुष, पशुओं में गौ, बकरे, घोड़े तथा हाथी, देव प्रतिमा, प्रज्वलित अग्नि, दूर्वा, ताजा गोबर, वेश्या, सोना, चाँदी, रत्न, बच, सरसों आदि औषधियाँ; मूँग, आयुधों में तलवार, छाता, पीढ़ा, राज चिन्ह, जिसके पास कोई रोता न हो ऐसा शव, फल, दही, दूध, अक्षत, दर्पण, मधु, शंख, ईख, शुभ सूचक वचन, भक्त पुरुषों का गाना-बजाना, मेघ की गंभीर आवाज-गर्जना, बिजली की चमक तथा मन का संतोष-ये सब सुभ सूचक शकुन हैं। सामने से : "चले आओ" सुनाई दे तो शुभ है।"जाओ" शब्द पीछे से सुनाई दे तो उत्तम है। एक और सब प्रकार के शकुन और दूसरी ओर मन की प्रसन्नता-ये दोनों बराबर हैं। 

 

 

 

Sighting of animals-birds having two or more heads in inauspicious .Whenever and where ever animals, having two or more heads are spotted, ill-bad luck strike the people of that locality, region.
आकाश से महा भयानक उल्कापात होना। गिद्ध, बाज, कंक, आदि पक्षियों द्वारा अत्यन्त कठोर शब्द करना।
महेश्वर जब अन्धक को दण्ड देने के लिए निकलने लगे तो उनकी बगल से श्रगालिनी स्थित होकर ऊँचे स्वर में बोलती हुई आगे-आगे जा रही थी। माँसभक्षी प्रणियों का समूह प्रसन्नतापूर्वक रक्त के लिये जा रहा था। शूलपाणि का दाँया अंग फड़क उठा। हारीत पक्षी मौन होकर पीछे की ओर जा रहे थे। ये शुभ लक्षण थे।[वामन पुराण]
भगवान्  राम ने लोकोपवाद के डर से धोबी के कहने पर माँ सीता का त्याग कर दिया। ऐसा उस श्राप के कारण हुआ किसके द्वारा माता सीता ने अपने बालपन में एक तोती को अपने साथ, उसकी इच्छा के विपरीत महल में रख लिया। ये धोबी पर्व जन्म में वही तोता था। माता सीता भगवान् श्री राम के आदेशानुसार लक्ष्मण जी के साथ वन में जाने लगीं तो चौखट लाँघने से पहले ही लड़खड़ाकर गिर गईं। उनका दाहिना नेत्र फड़कने लगा पुण्यमय पक्षी विपरीत दिशा से जाने लगे। मृग बायीं ओर से निकल के जाने लगे। इनके साथ अन्यानेक अपशकुन हुए।[रामायण]
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव। 
न च श्रेयोऽनुपश्यामि हत्वा स्वजनमाहवे॥31॥ 
भावार्थ: हे केशव! मैं लक्षणों (शकुनों) को भी विपरीत ही देख रहा हूँ तथा युद्ध में स्वजन-समुदाय को मारकर श्रेय-लाभ-कल्याण भी नहीं देखता।
निमित्तानि च पश्यामि विपरीतानि केशव: जो भी लक्षण प्रकट हो रहे हैं वे अशुभ की ओर इशारा कर रहे हैं। उल्कापात, असमय ग्रहण लगना, भूकम्प आना, पशु-पक्षियों का भयंकर बोली बोलना-कोलाहल, चन्द्रमा के दाग मिट जाना, रक्त की वर्षा होना, पशु-पक्षियों द्वारा अपने से भिन्न जाति के बच्चे पैदा करना आदि अनर्थ-तबाही की ओर इशारा करते हैं। मेरा मुँह सूखना, गाण्डीव का गिरना, शरीर का शिथिल होना, उत्साह होना, संकल्प-विकल्पों का ठीक न होना, कम्पन होना आदि अच्छे लक्ष्ण नहीं हैं। सामान्यतया देखा जाता हैं कि पुच्छल तारे का दिखना, कुत्ते-सियार का रोना, पक्षियों का कोलाहल, साँप का सर्दी में बिल से निकलना आदि जब भी कभी होता है, भयानक बरबादी-तबाही-महामारी लेकर आता है।
O! Keshav I am observing bad omens and do not find any gain-welfare-enhancement of reputation-honor by killing own relatives-friends in the war. (This war appears to be counter productive.)
NIMITTANI CH PASHYAMI VIPRITANI KESHAVH: The omens which are appearing indicate misfortune-devastation. Meteorite-cosmic showers, untimely eclipse, earth quake, fearful-dangerous-terrible sounds by the birds-animals, loss of black spots of the moon, rain of blood, excreta and suppurate-pus, giving birth to different species by the animals and birds, indulgence of humans in sex during the day-openly points to destruction-devastation. Drying of my mouth-lips, excessive sweat, falling of Gandeev (bow) from my hands, sudden loss of strength-weakening of body, trembling of body, maladjustment of various permutations and combinations goals-targets-indecisiveness, are not good omens. Its a common observation-feature that the citing of comets, weeping-growling of jackals and dogs in the residential areas, disturbing sounds by animals, coming out of snakes from the burrows during winters, are associated with massive-furious destruction-calamity.[गीता प्रथम अध्याय]
कनिक्रदज्जनुषं प्रब्रुवाण इयर्ति वाचमरितेव नावम्।
सुमङ्गलच शकुने भवासि त्वा का चिदभिभा विश्या विदत्
बारम्बार शब्दायमान और भविष्य वक्ता कपिञ्जल जैसे कर्णधार नौका को परिचालित करता है, वैसे ही वाक्य को प्रेरित करता है। हे शकुनि! आप कल्याण सूचक हो। किसी और किसी प्रकार की पराजय आपके पास न आवे।[ऋग्वेद 2.42.1]
बार-बार ध्वनि करने वाला भविष्य का निर्देश करने वाला कपिंजल जैसे नौका को चलाता है, वैसे ही वाणी को मार्ग दर्शन देता है। हे शकुनि (कौआ)! तुम मंगलप्रद होओ।किसी प्रकार की हार, कहीं से भी आकार तुमको ग्रहण न हो।
The way a boatman navigate the boat, fortune teller Kapinjal repeatedly pronounce-guide us. Hey Shakuni! You represent welfare. You should not face defeat in any way. 
Crying repeatedly, and foretelling what will come to pass, the Kapinjal gives due-suitable direction to through his voice, as a helmsman, guides a boat, be ominous, bird, of good fortune and may no calamity whatever befall you from any quarter.
कपिञ्जल :: Kapinjal, the Anukramanika has kanimatarupindro devata, francoline partridge.
मा त्वा श्येन उद्वधीन्मा सुपर्णो मा त्वा विददिषुमान्वीरो अस्ता।
पित्र्यामनु प्रदिशं कनिक्रदत्सुमङ्गलो भद्रवादी वदेह
हे शकुनि! आपको श्येन पक्षी न मारे गरुड़ पक्षी भी न मारे। वह बलवान, वीर और धनुर्धारी होकर आपको न प्राप्त करे। दक्षिण दिशा में बार-बार शब्द करके और सुमंगलशंसी होकर हमारे लिए प्रिय वादी बनें।[ऋग्वेद 2.42.2]
हे शकुनि! बाज पक्षी तुम्हारी हिंसा न करें। गरुड भी तुमको न मारे। वह वीर, बली हाथ में धनुष बाण लेकर भी तुम्हें प्राप्त न कर सके। तुम दक्षिण दिशा में लगातार शब्द करते हुए कल्याण सूचक हुए हमारे लिए प्रिय वचनों को बोलो।
Hey Shakuni! Let Shyen bird and Grud do not kill you. They should not kill you on being mighty, brave and bow-arrow wielding. Cry in the South repeatedly and become auspicious to us.   
अव क्रन्द दक्षिणतो गृहाणां सुमङ्गलो भद्रवादी शकुन्ते। 
मा नः स्तेन ईशत माघशंसो बृहद्वदेम विदथे सुवीराः
हे शकुनि! सुमंगल सूचक और प्रिय वादी होकर घर की दक्षिण दिशा में बोलो, जिससे चोर और दुष्ट व्यक्ति हमारे ऊपर प्रभुत्व न करे। पुत्र और पौत्र वाले होकर हम इस यज्ञ में प्रभूत स्तुति करें।[ऋग्वेद 2.42.3]
हे शकुनि! तुम घर की दक्षिणी दिशा में मृदुवाणी से कल्याण की खबर देने वाली ध्वनि उच्चारण करो। दुष्ट वञ्चक या असुर हमारे स्वामी एवं राजा न बन जायें। पुत्र-पौत्र से परिपूर्ण होकर हम उस अनुष्ठान में श्लोक का उच्चारण करेंगे।
Hey Shakuni! Be auspicious and spell lovely-pleasing words in the south direction of our homes, so that the thieves and the wicked do not over power us. We should have sons and grand sons and conduct out Yagy successfully. 
 प्रदक्षिणिदभि गृणन्तिकारवो वयो वदन्त ऋतुथा शकुन्तयः।
उभे वाचौ वदति सामगाइव गायत्रं च त्रैष्टुभं चानु राजति
समय-समय पर अन्न की खोज करके स्तोताओं की तरह शकुनि गण प्रदक्षिण करके शब्द करें। जिस प्रकार से साम गायक लोग गायत्री और त्रिष्टुप् (दोनों साम) का उच्चारण करते हैं, उसी प्रकार कपिञ्जल भी दोनों वाक्य का उच्चारण करते हुए श्रोताओं को अनुरक्त करते हैं।[ऋग्वेद 2.43.1]
समय-समय पर अन्न की खोज करने वाले पक्षीगण वदंना करने वालों की तरह परिक्रमा करते हुए सुन्दर ध्वनि उच्चारण करें। सोम गायको द्वारा गायत्री छन्द और त्रिष्टुप छन्द उच्चारण करने के तुल्य, कपिंजल भी दोनों प्रकार की वाणी करता हुआ सुनने वालों को मोहित कर लेता है। 
Time & again the Shkuni Gan (Crows) should produce sound while searching food like the Stota. The Kapinjal should recite two stanzas-Strotr, Mantr, hymns, the first Gayatri and the second Trishtup, both from Sam Ved amusing the listeners. 
उद्गातेव शकुने साम गायसि ब्रह्मपुत्रइव सवनेषु शंससि। वृषेव वाजी शिशुमतीरपीत्या सर्वतो नः शकुने भद्रमा वद विश्वतो नः शकुने पुण्यमा वद
हे शकुनि! जैसे उद्गीता साम गान (ऊँचे स्वर में गाया हुआ) करते हैं, वैसे ही आप भी गावें। यज्ञ में ब्रह्म पुत्र ऋत्विक् की तरह आप शब्द करें। जैसे सेचन समर्थ अश्व अश्वी के पास जाकर शब्द करता है, वैसे ही आप भी करें। हे शकुनि! आप सर्वत्र हमारे लिए मंगल सूचक और पुण्य जनक शब्द का उच्चारण करें।[ऋग्वेद 2.43.2]
हे शकुनि! सोम के उद्गाता जैसे सोम ग्रहण करते हैं, वैसे ही तुम भी सुन्दर गान करो यज्ञ में ऋत्विग्गण जैसे शब्द करते हैं, वैसे ही तुम भी करो। तुम सभी ओर से हमारे लिए पुष्य बढ़ाने वाले कल्याण की सूचना प्राप्त करते हो।
Hey Shakuni! You should sing the hymns of Sam Ved just like the singers of Sam Ved in loud voice. Sing it the way the son of Brahm Ritvik does. You should follow the manner-method in which the horse produce sound-neighing in the company of she horse-mare, inducing her for mating. Hey Shakuni! Always pronounce the words representing auspiciousness, welfare and virtues.
आवदंस्त्वं शकुने भद्रमा वद तूष्णीमासीनः सुमतिं चिकिद्धि नः। 
यदुत्पतन्वदसि कर्करिर्यथा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः
हे शकुनि! जिस समय आप शब्द करते हैं, उस समय हमारे लिए मंगल सूचना करते है। जिस समय चुप रहकर आप बैठते हैं, उस समय हमारे प्रति सुप्रसन्न रहते हैं। उड़ने के समय आप कर्करि (एक बाजा) की तरह शब्द करते है। हम पुत्र और पौत्र वाले होकर इस यज्ञ में प्रभूत स्तुति करें।[ऋग्वेद 2.43.3] 
जब तुम चुप होकर बैठ जाते हो तब ऐसा जान पड़ता है कि तुम हमारे से प्रसन्न नहीं हो। जब तुम उड़ते हो तब कर्करि के समान मृदु ध्वनि करते हो। हम पुत्र और पौत्रवान हुए इस अनुष्ठान में रचित हुई प्रार्थनाओं का गान करेंगे।
Hey Shakuni-crow! You always caw-produce sound indicating our welfare. When ever you sit silently we assume that you are unhappy with us. When you fly, you sound like the musical instrument called Karkari. We will accomplish a Yagy, when we are blessed with sons and grandsons. 
 
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संतोष महादेव-धर्म विद्या सिद्ध व्यास पीठ
(बी ब्लाक, सैक्टर 19, नौयडा)